Feb23

दरिया पनपने लगा

शोहरत का नशा ऐसा चढने लगा 
बुंद के मनमे दरिया पनपने लगा ।

दायरा नाम का युं तो फैला बहुत, 
आदमी खुद में लेकिन सिमटने लगा ।

मजहबी नाम लेकर वो आया तो था, 
साँस रुकते ही इंसान लगने लगा ।

-

Posted in વેદાંતની ગઝલો ૨૦૧૫-૧૬
.